कोरोना एक महामारी

कोरोना एक महामारी

कभी सोचा ना था ,ऐसा भी दिन आएगा |
लोगों से मिलने को ,दिल तरस जाएगा |
वो मंजर जो लोगों के साथ जिया,
वह कमरे में बैठकर याद आएगा|
कोरोना ने ऐसा मचाया तहलका,
आया भूचाल जीवन में सबके|
एक झटके में छीन लिया चैन ओ सुकून,
रुक गई जिंदगी और काम करने का जुनून|
बंद हो गए मॉल सभी, अब शॉपिंग का चक्कर नहीं|
बंद हो गए स्कूल सभी, अब पढ़ने का टेंशन नहीं|
करना है एकांतवास, अब समूह में रहना नहीं|
जीवन है अनमोल इसलिए, मनमानी करना नहीं |
वह स्कूल वह बच्चे ,वह साथी याद आते हैं|
घर में बैठे-बैठे अब, दिन भी ना कट पाते हैं|
और अंधेरा छाया प्रभु जी ,इससे हमें बचाओ तुम |
जैसे द्वापर में आए थे, वैसे ही अब आओ तुम |
रीत करें यह प्रार्थना, जीवन को बचाओ तुम|
दुविधा में यह विश्व खड़ा है ,सबको राह दिखाओ तुम|
वासवी राजू बरडे
  नागपुर, महाराष्ट्र

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