सुनो,
याद आ रही है तुम्हारी,
तुम मेरे बारे में सोचते भी नहीं हो ना।
हां नहीं सोचता मैं,
बस वो रात में जब तारे निकलते हैं ना,
उनसे तुम्हारी बात करता हूं मैं।
अच्छा, झूठ अच्छा बोलते हो तुम,
मगर मैं झूठ तुम्हारे सारे झूठ हूं।
हां हां, जानता हूं,
तुमसे मैं झूठ कहां बोल सकता हूं।
जानते हो तो झूठ बोलते क्यों हो,
जानती हूं नहीं याद करते।
मैं नहीं बात कर रही तुमसे,
रखो फोन।
मैं क्यूं रखूं,
तुम्हें नहीं करनी,
मुझे तो तुम्हारी आवाज़ सुननी है ना।
ठीक है, ठीक है,
नहीं होती गुस्सा,
मान गई मैं, अब ख़ुश!
हां बहुत ख़ुश।
ठीक है अब सो जाओ रात बहुत हो गई है।
सुनो थोड़ी देर और बात कर लो ना,
फ़िर सो जाऊंगा मैं।
अच्छा ठीक है तो बताओ क्या बोलना है?
कुछ नहीं बस प्यार बहुत है तुमसे।
फ़िर बस दोनों यूंही बातें करते करते कब सो गए
दोनों को पता नहीं चला।
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